सही और गलत के बीच अंतर बहुत थोड़ा सा होता है। कभी कभी तो अंतर इतना काम होता है की कहना मुश्किल होता है कि कहा पर झूठ ख़त्म हो रहा है और कहा से सच शुरू। बिलकुल किसी किनारे के रेट की तरह जब लहरे होती है तो वह समंदर का किनारा होता है और जब लहरे चली जाती है तो किनारा रह जाता है। सच और झूठ के बीच के अंतर का भी कुछ ऐसा ही हाल है जिसमे जज़्बात रेत का किरदार निभाती है।
Every special stories have something in common and every common story has something special .Here is some special parts of my common story.
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