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सब ख़त्म- सच में?

सुबह के चार बज रहे है|  नहीं , मुझे इतनी सुबह उठने की आदत नहीं है|  पर कुछ दिनों से रात भर जागा ही रहता हू। आज भी कुछ ऐसा ही है।  मुझे अभी भी चिंता सता रही है कि हम दोनों का रिश्ता कहाँ जाएगा, ये जानते हुए भी की ईशा के तरफ से ये सब बहुत पहले ही ख़त्म हो चुका है।
फ़ोन पर बात करते समय हमेशा की तरह आज भी मुझे यही लग रहा था जैसे वो मुझे टेस्ट कर रही हो।जैसे ही मैं बोला - 'चल यार सब ख़त्म, तू अपने रस्ते मै अपने।  '
वो बोलेगी 'ओह्ह, इतने में ही हार मान गया।  बहुत बड़ी बड़ी बाते किया करता था न? क्या हुआ हीरो!'
पर, इस बार लग रहा है सबकुछ ख़त्म। उसको मुझसे बात करने में कोई परेशानी नहीं है। हम दोस्त रह सकते है, पर मेरा मन मानने को तैयार नहीं है इस बात के लिए, जब प्यार का रिश्ता ख़त्म ही करना है तो ये दोस्ती वगैरह का चुतियाप करके काहे महान बन रही है। प्यार है तो है, नहीं तो नहीं।
'ठीक है, फिर सब ख़त्म'
'नहीं यार ऐसे कैसे सब ख़त्म, इतने दिनों से साथ थे'
'वी क्नोव  इच  अदर  क्वाईट वेल।  हा, कुछ गलतिया और गलतफहमियों के कारन अनबन है, पर ऐसे सबकुछ थोड़े ही  ख़त्म हो जाता है।'
'ट्रस्ट एक बार टूट जाये तो दोबारा फिर वैसी बॉन्डिंग नहीं रह जाती यार, तू समझऔर न ही कुछ भी पहले जैसा नहीं रहता है।' 
'ओके पहले जैसा नहीं पर हम साथ तो रहेंगे। अलग होकर कहीं, हम खुद अंदर से टूट गए तो?'
'मुझे इस बारे में और कुछ भी बात नहीं करनाआई एम डन।  ढेड़ साल हो चुके है हमे अलग हुए।  तू एक्सेप्ट  क्यों नहीं करता।  मै मूव ऑन  कर चुकी हु तू भी कर। '
'यार तू सुन तो सही, नहीं होता मुझसे ये ............'
'अबे तू खायेगा की पैक करवा कर के ले चले, तू बोलेगा तो पैक करवा लेते है।' मै तो ईशा से फ़ोन पर बात करते करते भूल ही गया था कि मै भास्कर के साथओल्ड गेट के बाहर पराठे खाने आया था। 
'तुझे पता है कि खुद तू ट्राय  नहीं करता।  नहीं मुझे इस बारे में और कुछ बात नहीं करना। एक्चुअली मुझे ना तेरे से बात ही नहीं करनी चाहिए।  मेरा एग्जाम चल रहा है मै फ़ोन रख रही हूँ।' दो बीप के बाद फ़ोन से आवाज़ आनी बंद हो गयी। रोहन के टोकने के कारन मुझे उसपर बहुत गुस्सा आ रहा था।
'चल मै आ रहा हूँ।' पता था एक बार कॉल  काटने ने बाद वो फ़ोन उठाने वाली नहीं थीं। मुझे इस वक़्त अकेला होना चाहिए था, मै रोना चाहता था, आंखे नम होकर छलछला रही थी।  पराठे पर फोकस करना बेकार साबित हुआ हो रहा था।
'मानव रो रहे हो' खुशबू ने चुटकी ली।
'हाँ यार' मैं दिखावा करने लगा कि हाँ, मै सच में रो रहा हु। नाटकीय अंदाज़ में जेब से रुमाल निकाला और सिसकने की एक्टिंग करने के बहाने से सच्चे आंसू  पोंछ लिए।
'लो अब नहीं रो रहा, खुश।'
अब तो  तुम भी खुश हो ना ईशा   



क्या  सबकुछ ख़त्म सच में ? शायद नहीं। अभी तो सिर्फ इश्क़ का पहला अध्याय ख़त्म हुआ है। ...... 

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